योग्यता के गुण

हे मानवश्रेष्ठों,

यहां पर मनोविज्ञान पर कुछ सामग्री लगातार एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने व्यक्ति के वैयक्तिक-मानसिक अभिलक्षणों की कड़ी के रूप में ‘योग्यता’ के अंतर्गत योग्यता की संकल्पना को समझने की कोशिश की थी, इस बार हम योग्यता की गुणात्मक अभिलाक्षणिकताओं पर चर्चा करेंगे ।

यह ध्यान में रहे ही कि यहां सिर्फ़ उपलब्ध ज्ञान का समेकन मात्र किया जा रहा है, जिसमें समय अपनी पच्चीकारी के निमित्त मात्र उपस्थित है।


योग्यता के गुणात्मक तथा परिमाणात्मक पहलू

( qualitative and quantitative aspects of ability )

मनुष्य की योग्यता उसका एक वैयक्तिक-मानसिक गुण है, जो उसे दूसरे मनुष्यों से भिन्न बनाती है। लोगों से एक जैसे परिणामों की अपेक्षा नहीं की जा सकती, क्योंकि वे योग्यता की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होते हैं। इसी कारण योग्यता की चर्चा करते समय इन भिन्नताओं को अभिलक्षित करना आवश्यकहै। वे गुणात्मक तथा परिमाणात्मक दोनों हो सकती हैं। अध्यापक के लिए यह जानना भी समान रूप से महत्त्वपूर्ण है कि छात्र में किस प्रकार की सक्रियता की योग्यता है और फलस्वरूप उसके व्यक्तित्व की कौन-सी वैयक्तिक-मानसिक विशेषताएं उसके कार्यकलाप की प्रक्रिया में उसकी सफलता की आवश्यक शर्त के रूप में शामिल होती है ( योग्यता के गुणात्मक पहलू ) और छात्र की योग्यता कितनी मात्रा में दत्त सक्रियता की अपेक्षाओं की पूर्ति करती है, वह दूसरों की तुलना में कितनी जल्दी, सुगमतापूर्वक तथा बुनियादी रूप में आदतें, कौशल और ज्ञान आत्मसात् करता है ( योग्यता का परिमाणात्मक पहलू )।

योग्यता की गुणात्मक अभिलाक्षणिकताएं

( qualitative characteristics of ability )

गुणात्मक अभिलाक्षणिकताओं के पहलू से देखने पर योग्यता मनुष्य के मानसिक गुणों के बहुमुखी समुच्चय ( versatile set ) के रूप में प्रकट होती है, जो व्यक्ति को भिन्न-भिन्न विधियों का उपयोग करते हुए किसी विशिष्ट सक्रियता में सफलता प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। यहां संगठनात्मक योग्यता ( organizational ability ) की अभिव्यक्ति का एक उदाहरण नीचे दिया जा रहा है :

दसवीं कक्षा का किशोर नेता विपिन का चरित्र-निरूपण अध्यापकों ने इस तरह किया है – वह ऐसा व्यक्ति है, जिसमें असाधारण संगठनात्मक क्षमता है, वह पहलकदमी प्रदर्शित करता है, उसमें प्रेक्षण की शक्ति, प्रवीणता ( proficiency ), व्यवहार-कुशलता, कड़ी अपेक्षाओं से जुड़ी साथीपन की भावना तथा अन्य लोगों की चिंता, उत्तरदायित्व की अनुभूति, वैयक्तिक आकर्षण, लोगों की दिलचस्पी, उनके चरित्रों, रुचियों तथा संभावनाओं का सही-सही मूल्यांकन करने की क्षमता है। उसकी योग्यता दूसरे किशोर नेताओं से केवल बेहतर तथा अधिक ही नहीं है, अपितु वह कुछ अन्य किशोर नेताओं की योग्यता से गुणगत रूप से भिन्न है। 

उसी स्कूल की नवीं कक्षा का मनोज संदेहास्पद कारनामों की पहल करनेवाला है। वह भी बेहतरीन संगठनकर्ता है, परंतु सर्वथा भिन्न प्रकार का। उसकी संगठन-योग्यता मनोवैज्ञानिक गुणों के भिन्न समुच्चय से उत्पन्न होती है। ये गुण हैं : क्रूरता, अपनी मंडली के हर सदस्य की कमजोरियों का फायदा उठाने और उनसे खिलवाड़ करने की तत्परता तथा कुशलता, उद्यमशीलता, सत्तालोलुपता, निरंतर डींग हांकते रहना और उसके साथ-साथ दुःसाहसिकता की प्रवृत्ति, आदि। 

किसी न किसी तरह के कार्यकलाप की, एक ही तरह की अथवा मिलती-जुलती उपलब्धियों का आधार सर्वथा भिन्न-भिन्न योग्यताओं का संयोजन ( combination ) होता है। यह चीज़ हमारे समक्ष व्यक्तित्व का एक महत्त्वपूर्ण पहलू उजागर कर देती है। यह है एक प्रकार के गुणों की दूसरे गुणों से प्रतिपूर्ति ( compensation ) की व्यापक संभावनाएं, जिन्हें मनुष्य कठोर तथा अडिग परिश्रम के ज़रिए अपने अंदर विकसित कर सकता है। मनुष्य की योग्यता की प्रतिपूर्तिकारी संभावनाएं, उदाहरण के लिए, अंधों तथा बधिरों की विशेष शिक्षा-दीक्षा में प्रकट होती है।

अपनी शैशवावस्था में ही दृष्टि तथा श्रवण-शक्ति खो बैठी एक लड़की पारुल में, विशेष अध्यापन के दौरान, न केवल ज्ञान-विज्ञान विषयक कार्य करने की योग्यता ही उजागर तथा विकसित हुई, अपितु उसकी साहित्यिक योग्यता भी प्रकाश में आई। शिक्षा की सही प्रणाली तथा सतत प्रयासों ने पारुल के लिए अपने अंदर विश्लेषकों की संवेदनशीलता का विकास करने, स्पर्श, घ्राण तथा कम्पन के संवेदनों का अत्यंत उच्च स्तर प्राप्त करना संभव बनाया, जिन्होंने उसमें अन्य योग्यताओं के अभाव की कुछ हद तक प्रतिपूर्ति की। 

ऐसे बहुत-से प्रमाण हैं, जो बताते हैं कि पूर्ण श्रवण-शक्ति जैसी महत्त्वपूर्ण सांगीतिक योग्यता का अभाव, संगीत के प्रति पेशेवर रुख़ अपनाने के मार्ग में बाधक नहीं बन सकता। संगीत की पूरी पकड़ से वंचित प्रशिक्षार्थी ध्वनीरूप की पकड़, सांगीतिक स्वरांतराल के बारे में स्मरण-शक्ति, आदि गुणों का साकल्य अपने अंदर विकसित करने में सफल रहे, उन्होंने सुरों में वैसे ही अंतर करने की क्षमता प्राप्त की, जैसे कि संगीत की पूरी पकड़ की क्षमता से युक्त लोग किया करते हैं। 

कुछ योग्यताओं की सहायता से दूसरी योग्यताओं के अभाव की प्रतिपूर्ति करनेवाली विशेषताएं लगभग प्रत्येक मनुष्य के सामने अपार संभावनाओं के द्वार खोल देती है, उसके लिए व्यवसायों के चयन की परिधि का विस्तार करती हैं और उसे अपने व्यवसाय में पारंगत बनने की संभावना प्रदान करती हैं।

कुल मिलाकर योग्यताओं की गुणात्मक अभिलाक्षणिकताएं, इस प्रश्न का उत्तर देना संभव बनाती हैं कि श्रम-सक्रियता के किस क्षेत्र ( डिज़ाइन, शिक्षाशास्त्र, अर्थव्यवस्था, खेलकूद, आदि ) में मनुष्य अपनी प्रतिभा प्रकट कर सकता है, किस क्षेत्र में उसकी सफलताएं तथा उपलब्धियां सबसे अधिक प्रकट हो सकती हैं। इस कारण योग्यताओं की गुणात्मक अभिलाक्षणिकताएं, परिमाणात्मक पहलू से अविच्छेद्य रूप से जुड़ी होती हैं। यह पता लग जाने पर कि कौन-से ठोस मानसिक गुण संबद्ध कार्यकलाप की अपेक्षाओं से मेल खाते हैं, हम इस प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं कि वे संबद्ध मनुष्य मे कितनी मात्रा में विकसित हैं – अपने सहयोगियों तथा सहपाठियों की तुलना में कम या अधिक।


इस बार इतना ही।

जाहिर है, एक वस्तुपरक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गुजरना हमारे लिए कई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है, हमें एक बेहतर मनुष्य बनाने में हमारी मदद कर सकता है।

शुक्रिया।

समय

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4 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. चंदन कुमार मिश्र
    फरवरी 25, 2012 @ 22:04:20

    आप यहाँ भी हैं, अभी जाना!
    बढिया है!

    प्रतिक्रिया

  2. rahulaviral
    फरवरी 26, 2012 @ 08:45:29

    sunder ati sunder

    प्रतिक्रिया

  3. naman kalkhuria
    फरवरी 26, 2012 @ 20:11:49

    bahut achaa

    प्रतिक्रिया

  4. Trackback: योग्यता की मात्रा « समय के साये में

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