चारित्रिक गुणों के संबंध

हे मानवश्रेष्ठों,

यहां पर मनोविज्ञान पर कुछ सामग्री लगातार एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने व्यक्ति के वैयक्तिक-मानसिक अभिलक्षणों की कड़ी के रूप में चरित्र की अवधारणा पर चर्चा की थी, इस बार हम ‘चरित्र’ की संरचना के अंतर्गत चारित्रिक गुणों के संबंधो को समझने की कोशिश करेंगे।

यह ध्यान में रहे ही कि यहां सिर्फ़ उपलब्ध ज्ञान का समेकन मात्र किया जा रहा है, जिसमें समय  अपनी पच्चीकारी के निमित्त मात्र उपस्थित है।


चरित्र की संरचना
चारित्रिक गुणों के संबंध

मनुष्य का चरित्र सदैव बहुआयामी ( multidimensional ) होता है। उसके पृथक-पृथक गुणों या पहलुओं का चयन किया जा सकता है, जो एक दूसरे से अलग-अलग रूप में विद्यमान नहीं होते, अपितु एक सूत्र में जुड़े होते हैं, उनसे चरित्र की एक अखंड संरचना बनती है।

चरित्र की संरचनात्मकता, उसके पृथक-पृथक गुणों के बीच नियमसंगत निर्भरता में उजागर होती है। यदि कोई मनुष्य कायर है, तो उसके बारे में हम यह भी मान सकते हैं कि उसमें पहलकदमी ( initiative ) का अभाव है ( यानि वह डरता है कि उसके प्रस्ताव या कार्रवाई के प्रति, जिनके लिए उसने पहलकदमी की, प्रतिकूल प्रतिक्रिया हो सकती है ), उसमें दृढ़ संकल्प तथा स्वावलंबन नहीं है ( क्योंकि निर्णय लेने का अर्थ व्यक्तिगत दायित्व ग्रहण करना है ), उसमें आत्मत्याग तथा उदारता का अभाव है ( दूसरों की सहायता से उसके निजी हितों को आंच आ सकती है, जो उसके लिए खतरनाक है )। इसके साथ ही चरित्र की दृष्टि से कायर व्यक्ति में हीन-भावना तथा चापलूसी ( अधिक बलवान के प्रति ), अनुरूपता ( औरों से अलग न दिखाई देने के लिए ), लालच ( भविष्य में अपनी भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ), गद्दारी की तत्परता ( कम से कम उन परिस्थितियों में, जब उसकी सुरक्षा खतरे में हो ), अविश्वास की भावना तथा अतिसतर्कता, आदि लक्षण भी पाए जाते हैं।

जाहिर है, प्रत्येक व्यक्ति में, जिसके चरित्र पर कायरता हावी होती है, ये सब चर्चित लक्षण प्रकट नहीं होते। जीवन की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में मनुष्य के चरित्र की संरचना सारतः रूपांतरित ( convert ) हो सकती है और उसमें वे लक्षण तक शामिल हो सकते हैं, जो प्रतीयमान ( seeming ) रूप से हावी लक्षण के विपरीत होते हैं ( उदाहरण के लिए, कायर उद्धत भी हो सकता है )। परंतु कायर मनुष्य में समग्र रूप से चरित्र के ऐसे ही गुणों की ओर आम रूझान देखने को मिलता है।

चरित्र के नाना गुणों में से कुछ बुनियादी, अग्रणी गुणों के रूप में पेश आते हैं, जो उसकी अभिव्यक्तियों के विकास की पूर्ण समग्रता ( totality ) की आम दिशा निर्धारित करते हैं। उनके साथ-साथ द्वितीयक गुण भी विद्यमान होते हैं, जो कुछ सूरतों में मुख्य गुणों से निर्धारित होते हैं और दूसरी सूरतों में उनका मुख्य गुणों के साथ सामंजस्य नहीं होता। वास्तविक जीवन में अधिक अखंड तथा अधिक विरोधपूर्ण, दोनों तरह के चरित्र देखने को मिलते हैं। चरित्रों की अपार विविधता में अखंड चरित्रों के अस्तित्व की बदौलत कुछ निश्चित क़िस्में निर्धारित की जा सकती हैं, जिनमें कतिपय लक्षण एक समान होते हैं। चरित्र की अखंडता उसमें विरोधात्मकता को पूर्णतः वर्जित नहीं करती : सह्र्दयता की कभी-कभी सिद्धांतनिष्ठता से और विनोद की भावना की उत्तरदायित्व से टक्कर हो सकती है।

चारित्रिक गुणों को आस्थाओं, जीवन के प्रति दृष्टिकोण तथा व्यक्तित्व के रूझान ( trends ) की अन्य विशेषताओं के सदृश नहीं माना जा सकता। एक बहुत नेक स्वभाववाला और ख़ुशमिज़ाज मनुष्य बहुत सदाचारी तथा शिष्ट हो सकता है, जबकि वैसा ही दूसरा सदाचारी तथा ख़ुशमिज़ाज मनुष्य टुच्चा धंधेबाज़ हो सकता है, जो केवल अपनी ही सुख-समृद्धि की चिंता करता है और अपने लक्ष्यों की सिद्धि के लिए हर तरह के गंदे साधनों तक का उपयोग करने में नहीं चूकता।

परंतु चरित्र के कुछ लक्षण व्यक्तित्व के रूझान से निर्धारित होते हैं। अतः कुछ लक्षण निश्चित नैतिक सिद्धांतों तथा आस्थाओं से मेल खा सकते हैं, कभी-कभी वे अनिवार्य रूप से उनके साथ संलग्न होते हैं, कुछ मामलों में वे संबद्ध परिवेश में विद्यमान विचारों, नैतिकता के मापदंडों तथा सिद्धांतों के विपरीत हो सकते हैं। उदाहरण के रूप में ईमानदारी जैसा महत्त्वपूर्ण, प्रमुख गुण उनके साथ मेल खा भी सकता है और नहीं भी खा सकता है।

अक्सर हमें इस या उस मनुष्य की असाधारण ईमानदारी के क़िस्से सुनने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, किसी टैक्सी-ड्राइवर को अपनी गाड़ी की पिछली सीट पर एक बड़ा हैंडबैग पड़ा मिला, जिसमें बहुत बड़ी धनराशि थी। उसने मुसाफ़िर को ढूंढ निकाला, और धनराशि लौटा दी गई। ईमानदारी की ऐसी अभिव्यक्तियां लोगों के मन में आम तौर पर आदर की भावना पैदा करती हैं, परंतु वे असामान्य भी नहीं प्रतीत होतीं। फिर भी हमें ऐसे लोग मिल सकते हैं, जो ऐसी कार्रवाइयों से सचमुच चकित हो उठते हैं अथवा उनका मखौल तक उड़ा सकते हैं।


इस बार इतना ही।

जाहिर है, एक वस्तुपरक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गुजरना हमारे लिए कई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है, हमें एक बेहतर मनुष्य बनाने में हमारी मदद कर सकता है।

शुक्रिया।

समय

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