सक्रियता की व्यक्तिगत शैली

हे मानवश्रेष्ठों,

यहां पर मनोविज्ञान पर कुछ सामग्री लगातार एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने व्यक्ति के वैयक्तिक-मानसिक अभिलक्षणों को समझने की कड़ी के रूप में बौद्धिक योग्यताएं, सक्रियता-प्रणाली और स्वभाव को समझने की कोशिश की थी, इस बार हम सक्रियता की व्यक्तिगत शैली पर चर्चा करेंगे।

यह ध्यान में रहे ही कि यहां सिर्फ़ उपलब्ध ज्ञान का समेकन मात्र किया जा रहा है, जिसमें समय  अपनी पच्चीकारी के निमित्त मात्र उपस्थित है।


व्यावसायिक अपेक्षाएं और स्वभाव

कुछ ख़ास क्षेत्रों में स्वभाव ( nature ) की विशेषताएं न केवल सक्रियता को, अपितु उसके अंतिम परिणामों को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे क्षेत्रों के संबंध में मन के कुछ गतिक गुण ज़्यादा अनुकूल होते हैं और कुछ कम अनुकूल। जिन क्षेत्रों में क्रियाओं की तीव्रता की दर अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, वहां बौद्धिक गतिक गुण, काम के लिए मनुष्य की उपयुक्तता का निर्धारण करनेवाला एक महत्त्वपूर्ण कारक बन सकते हैं। वास्तव में कतिपय व्यवसायों ( professions ) के लिए उच्च गतिक अभिलक्षणों ( high dynamic characteristics ) की अपेक्षा होती है, जो प्रत्याशियों का प्राथमिक चुनाव आवश्यक बना देती है। उदाहरण के लिए, पायलट, ड्राइवर या सर्कस के कलाबाज़ के लिए गतिशील तथा मजबूत तंत्रिका-तंत्र की आवश्यकता होती है। इसी तरह संवेगात्मक उत्तेज्यता ( impulsive excitement ) जैसे गुण के बिना अभिनेता या संगीतज्ञ नहीं बना जा सकता।

किंतु अधिकांश व्यवसायों में सक्रियता की गतिकी से संबंधित स्वभावगत विशेषताएं उसकी अंतिम कारगरता ( effectiveness ) को प्रभावित नहीं करती। स्वभाव के किसी भी भेद की जो कमियां हैं, उनकी प्रतिपूर्ति ( compensation ) अपनी सक्रियता में मनुष्य की गहन रुचि, तैयारी के उच्च स्तर और संकल्पात्मक प्रयासों ( volitive efforts ) से की जा सकती है।

सर्वविदित है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कला जैसे सभी सृजनात्मक ( creative ) क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलताएं पानेवाले सभी लोगों के स्वभाव एक जैसे नहीं होते। सृजनशील व्यक्ति की एक मुख्य विशेषता अपने कार्यों की प्रणालियों का विशिष्टिकरण है, यानि वह सचेतन अथवा अचेतन रूप से अपने कार्य में ऐसी शैलियों ( styles ) तथा तकनीकों ( techniques ) का प्रयोग करता है कि जो उसके अपने स्वभाव से अधिकतम मेल खाती है

सक्रियता की व्यक्तिगत शैली

स्वभाव अपने को सर्वप्रथम कार्य-प्रणालियों की विशिष्टता ( specialty, uniqueness ) में व्यक्त करता है, ना कि कार्य की कारगरता ( effectiveness ) में। कार्य-निष्पादन में उच्च-परिणाम गतिशील और जड़, दोनों तरह के तंत्रिका-तंत्रवाले व्यक्तियों द्वारा पाये जा सकते हैं। यह पाया गया है कि विपरीत गतिशीलता-अभिलक्षणवाले व्यक्ति, श्रम-परिस्थितियों के समान होने पर भी अलग-अलग कार्यनीतियां ( strategies ) अपनाते हैं। शानदार उत्पादन-परिणाम उन व्यक्तियों द्वारा पाए जाते हैं, जिनके काम की शैली तथा प्रणालियां उनकी अपनी विशेषताओं से मेल खाती हैं। इस तरह हम देखते हैं कि स्वभाव, सक्रियता की व्यक्तिगत शैली ( personal style ) का निर्धारण करता है।

व्यक्तिगत शैलियों की समस्या का अध्ययन करनेवाले मनोविज्ञानियों की खोजें दिखाती हैं कि ये शैलियां तुरंत और संयोगवश नहीं पैदा होतीं।व्यक्तिगत शैली का निर्माण तथा सुधार तभी होता है, जब मनुष्य बेहतर परिणाम पाने के लिए अपने स्वभाव के अनुरूप उपाय तथा तरीक़े सक्रिय रूप से खोज रहा हो। सभी दक्ष मज़दूरों, उत्कृष्ट खिलाड़ियों और तेज़ छात्रों की कार्य करने की अपनी व्यक्तिगत शैली होती है।

यह ध्यान देने योग्य बात हैं कि हर व्यक्ति द्वारा अलग से कार्य किए जाने की तुलना में संयुक्त सक्रियता में, विशेषतः जब कार्य दो व्यक्तियों द्वारा मिल-जुलकर किया जा रहा हो, उनके स्वभाव के गतिक लक्षण, सक्रियता के अंतिम परिणाम पर कहीं अधिक प्रभाव डालते है। इतना ही नहीं, संयुक्त सक्रियता से किन्हीं निश्चित स्थितियों के लिए विभिन्न प्रकार के स्वभावों के अधिक अनुकूल और कम अनुकूल संयोजन ( combination  ) भी पता चल जाते हैं। उदाहरण के लिए, उन मामलों में पित्तप्रकृति ( कोपशील ) मनुष्य की सक्रियता तब अधिक कारगर सिद्ध होती है, जब वह किसी श्लैष्मिक प्रकृति ( शीतस्वभाव ) या वातप्रकृति ( विषादी ) व्यक्ति के साथ मिलकर काम करता है। उसका किसी रक्तप्रकृति ( प्रफुल्लस्वभाव ) अथवा अपने ही जैसे स्वभाववाले व्यक्ति के साथ मिलकर काम करना उतना कारगर नहीं साबित होता। ऐसे तथ्य दिखाते हैं कि स्वभाव की किन्हीं निश्चित विशेषताओं का महत्त्व ठीक-ठीक तभी आंका जा सकता है कि जब संयुक्त-सक्रियता मे उनकी भूमिका को पूरी तरह ध्यान में रखा जाए।

मनुष्य अपने स्वभाव को जानना बचपन में ही शुरू कर देता है। शिक्षण तथा शिक्षा की प्रक्रिया में वह स्वभाव के नकारात्मक पहलुओं से होनेवाली हानि की प्रतिपूर्ति ( compensation ) के तरीक़े सीखता है और सक्रियता की अपनी व्यक्तिगत शैली विकसित करता है।


इस बार इतना ही।

जाहिर है, एक वस्तुपरक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गुजरना हमारे लिए कई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है, हमें एक बेहतर मनुष्य बनाने में हमारी मदद कर सकता है।

शुक्रिया।

समय

Advertisements

2 टिप्पणियाँ (+add yours?)

  1. Narpatsingh Udawat Rishi
    दिसम्बर 25, 2011 @ 09:26:55

    Bahut achchha.

    प्रतिक्रिया

  2. Trackback: स्वभाव और शिक्षा « समय के साये में

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: