इच्छाशक्ति की व्यक्तिपरक विशिष्टताएं

हे मानवश्रेष्ठों,

यहां पर मनोविज्ञान पर कुछ सामग्री लगातार एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने व्यक्तित्व के संवेगात्मक-संकल्पनात्मक क्षेत्रों को समझने की कड़ी के रूप में संकल्पात्मक क्रियाओं की संरचना को समझने की कोशिश की थी, इस बार हम इच्छाशक्ति की व्यक्तिपरक विशिष्टताओं पर चर्चा करेंगे।

यह ध्यान में रहे ही कि यहां सिर्फ़ उपलब्ध ज्ञान का समेकन मात्र किया जा रहा है, जिसमें समय  अपनी पच्चीकारी के निमित्त मात्र उपस्थित है।


इच्छाशक्ति की व्यक्तिपरक विशिष्टताएं

( Subjective features of volition )

मनुष्य की सक्रियता के सचेतन संगठन तथा नियमन ( regulation ) के रूप में इच्छाशक्ति आंतरिक कठिनाइयों को लांघने की ओर लक्षित होती है और मुख्य रूप से आत्म-नियंत्रण ( self control ) के रूप में अपने को प्रकट करती है। सर्वविदित है कि आत्म-नियंत्रण की क्षमता सभी लोगों में एक जैसी नहीं होती। इच्छाशक्ति की बहुत ही विविध व्यक्तिपरक विशिष्टताएं मिलती हैं। फिर तीव्रता की दृष्टि से भी, प्रचंड और दुर्बल के बीच इसकी बहुविध अभिव्यक्तियां पाई जाती हैं। प्रचंड इच्छाशक्तिवाला मनुष्य अपने लक्ष्य के मार्ग में आनेवाली कैसी भी कठिनाइयों को लांघ सकता है और दृढ़निश्चय, साहस और सहनशक्ति जैसे संकल्पमूलक गुण प्रकट करता है। इसके विपरीत दुर्बल इच्छाशक्तिवाला आदमी कठिनाइयों से कतराता है, साहस, दृढ़ता तथा संयम का अभाव दिखाता है और नैतिक सिद्धांतों पर आधारित उच्चतर अभिप्रेरकों की ख़ातिर क्षणिक इच्छाओं, आकांक्षाओं को दबाने में असमर्थ सिद्ध होता है।

दुर्बल इच्छाशक्ति की अभिव्यक्तियां भी उतनी ही विविध हैं, जितने विविध दृढ़ इच्छाशक्ति के लिए लाक्षणिक गुण हैं। इच्छाशक्ति की दुर्बलता की चरम अभिव्यक्तियां, जैसे संकल्प-अक्षमता और गति-अक्षमता, सामान्य मानस की सीमा के बाहर है।

संकल्प-अक्षमता सक्रियता के उत्प्रेरण के अभाव और निर्णय लेने या कार्य करने की अयोग्यता को कहते हैं, जिनका कारण मस्तिष्क के विकार हैं। संकल्प-अक्षमता का रोगी चिकित्सक के निर्देशों के पालन की आवश्यकता स्पष्टतः अनुभव करने पर भी अपने को उनके पालन के लिए तैयार नहीं कर पाता। गति-अक्षमता प्रमस्तिष्क के प्रेरक क्षेत्र ( ललाट खंडों ) में विकृतियों के कारण सोद्देश्य क्रियाएं करने की अयोग्यता को कहते हैं। यह अपने को निर्धारित कार्यक्रम के बाहर स्थित गतियों तथा क्रियाओं के ऐच्छिक विनिमयन ( voluntary regulation ) के क्षीण बनने में प्रकट करता है। गति-अक्षमता संकल्पात्मक क्रियाओं के निष्पादन ( execution ) को असंभव बना देती है।

संकल्प-अक्षमता और गति-अक्षमता अपेक्षाकृत विरल विकृतियां हैं और मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंचे होने का संकेत देती हैं। शिक्षकों का अपने कार्य के दौरान दुर्बल इच्छाशक्ति की जिस परिघटना से प्रायः साक्षात्कार होता है, सामान्यतः उसका कारण कोई विकृति नहीं, अपितु ग़लत शिक्षा और पालन होते हैं। यह कमी व्यक्तित्व-निर्माण की व्यूह रचना के दायरे में संगठित शिक्षा प्रयासों से दूर की जा सकती है। दुर्बल इच्छाशक्ति की सबसे ठेठ अभिव्यक्ति आलस्य ( laziness ), अर्थात कठिनाइयों से बचने और संकल्पात्मक प्रयासों से कतराने की प्रवृत्ति है। ध्यान देने योग्य बात है कि बहुत-से लोग सामान्यतः अपनी कमियां स्वीकार करने को सहमत न होने पर भी आलस्य को अपनी सभी दिक़्क़तों की जड़ मान लेने पर तुरंत राज़ी हो जाते हैं। “आपने ठीक कहा, मैं आलसी हूं” – मित्रों द्वारा आलोचना किए जाने पर कोई भी आदमी यह कह सकता है और मुस्कुराते हुए अपनी छोटी-मोटी ग़लतियां सहर्ष स्वीकार कर लेता है। इस सहजता से की हुई स्वीकारोक्ति के पीछे वास्तव में मनुष्य की अपने बारे में ऊंची राय छिपी होती है। वह जैसे यह कहती है कि इस आदमी में बहुत से गुण छिपे हैं, जो अगर यह आलसी न होता, तो वे अपने को अवश्य ही प्रकट कर देते।

किंतु स्वीकारोक्ति में छिपा यह भाव सर्वथा भ्रांतिजनक है। निष्कर्मण्यता मनुष्य की अशक्तता तथा ढीले-ढालेपन को, उसकी अपने को जीवन के अनुकूल ढाल पाने की असमर्थता तथा साझे ध्येय के प्रति उदासीनता को इंगित करती है। आलसी मनुष्य की विशेषता नियंत्रण का बाह्य स्थान-निर्धारण है और इसलिए वह ग़ैर-ज़िम्मेदार होता है। आलस्य और दुर्बलता की अन्य अभिव्यक्तियां – कायरता, अनिश्चय, संयम का अभाव, आदि – व्यक्तित्व के गंभीर दोष हैं, जिन्हें दूर करने के लिए बड़े शैक्षिक प्रयासों और मुख्य रूप से कड़ी आत्म-शिक्षा ( self-education ) की आवश्यकता होती है।

इच्छाशक्ति के सकारात्मक गुण, उसकी दृढ़ता की अभिव्यक्तियां सफल सक्रियता की महत्त्वपूर्ण पूर्वापेक्षा ( pre-requisite ) हैं और उनसे मनुष्य के व्यक्तित्व की अच्छी तस्वीर बनती है। इन गुणों में निर्भीकता, कर्मठता, दृढ़निश्चय, आत्मनिर्भरता, आत्म-नियंत्रण, आदि शामिल किए जाते हैं। दृढ़निश्चय ( determination ) एक संकल्पमूलक गुण है, जो दिखाता है कि दत्त मनुष्य स्वतंत्र महत्त्वपूर्ण निर्णय ले सकता है और उन्हें क्रियान्वित कर सकता है। दृढ़ चरित्रवाले मनुष्य में अभिप्रेरकों का द्वंद लंबी प्रक्रिया नहीं बनता और शीघ्र ही किसी निर्णय के लिए जाने और क्रियान्वित किए जाने के साथ समाप्त हो जाता है। यह निर्णय सदा सामयिक ( कभी-कभी तत्क्षण भी ) और खूब सोचा-विचारा होता है। जल्दबाज़ी में लिया हुआ निर्णय प्रायः मनुष्य की आंतरिक तनाव से मुक्ति पाने और अभिप्रेरकों के द्वंद को खत्म करने की इच्छा का सूचक होता है, ना कि चरित्र की दृढ़ता का। दूसरी ओर, निर्णय लेने तथा उसे अमली रूप देने को लगातार टालना निश्चय ही कमज़ोर इच्छाशक्ति का प्रमाण है।

इच्छा की स्वतंत्रता के लिए, एक ओर, दूसरों की सलाहों तथा रायों को सुनना और, दूसरी ओर, उनके बारे में संयत रवैया ( moderate attitude ) अपनाना आवश्यक है। दृढ़निश्चय और स्वावलंबन ( independence ) संकल्पात्मक कार्यों में नियंत्रण के आंतरिक स्थान-निर्धारण के परिचायक होते हैं। स्वतंत्र इच्छा, एक ओर, जिद्दीपन ( waywardness ) तथा नकारवाद ( denial ) की विरोधी है और, दूसरी ओर, सहजप्रभाव्यता ( impressionable ) तथा अनुकारिता ( imitability ) की प्रतिध्रुवस्थ। सहजप्रभाव्य मनुष्य की अपनी कोई राय नहीं होती और उसका व्यवहार परिस्थितियों तथा दूसरे लोगों के प्रभाव पर निर्भर होता है, जबकि जिद्दीपन मनुष्य को तर्कबुद्धि के विरुद्ध कार्य करने और अन्य लोगों की सलाह पर कोई ध्यान न देने को प्रेरित करता है। अंतर्वैयक्तिक संबंधों में आत्म-निर्भरता अथवा इच्छा-स्वातंत्र्य व्यक्तित्व की एक विशेषता के नाते अपने को सामूहिकतावादी आत्म-निर्णय में अधिकतम व्यक्त करते हैं।

इच्छाशक्ति को “दृढ़ता-दुर्बलता” के मापदंड से ही नहीं आंका जा सकता। इच्छा का नैतिक पहलू, उसकी समाजोन्मुखता तथा परिपक्वता भी, अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। दूसरे शब्दों में, संकल्पात्मक कार्यों का नैतिक मूल्यांकन मनुष्य के अभिप्रेरकों की सामाजिक महत्व पर निर्भर होता है


इस बार इतना ही।

जाहिर है, एक वस्तुपरक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गुजरना हमारे लिए कई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है, हमें एक बेहतर मनुष्य बनाने में हमारी मदद कर सकता है।

शुक्रिया।

समय

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  1. Trackback: स्वभाव की संकल्पना ( concept of human nature ) « समय के साये में

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