अनैच्छिक स्मरण ( involuntary memorization )

हे मानवश्रेष्ठों,

यहां पर मनोविज्ञान पर कुछ सामग्री लगातार एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को समझने की कड़ी के रूप में अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मरण पर विचार किया था, इस बार हम अनैच्छिक स्मरण पर चर्चा करेंगे।

यह ध्यान में रहे ही कि यहां सिर्फ़ उपलब्ध ज्ञान का समेकन मात्र किया जा रहा है, जिसमें समय  अपनी पच्चीकारी के निमित्त मात्र उपस्थित है।


अनैच्छिक स्मरण
( involuntary memorization )

सक्रियता, जिसमें की स्मरण की प्रक्रियाएं भी शामिल हैं, के लक्ष्यों के अनुसार हम स्मरण के दो मुख्य रूपों में भेद कर सकते हैं : अनैच्छिक स्मरण और ऐच्छिक स्मरण

अनैच्छिक स्मरण ( involuntary memorization ) संज्ञानात्मक ( cognitive ) और व्यावहारिक क्रियाओं का उत्पाद और उनके निष्पादन ( execution ) की पूर्वापेक्षा ( prerequisites )  है। चूंकि स्वयं स्मरण हमारा लक्ष्य नहीं होता, इसलिए हमें लगता है कि वह एक स्वतःस्फूर्त क्रिया है। किंतु वास्तव में यह हमारी सक्रियता की विशिष्टताओं द्वारा निर्धारित एक अत्यंत व्यवस्थित प्रक्रिया है। अनुसंधान दिखाते हैं कि अनैच्छिक स्मरण की परिणामदायिता काफ़ी हद तक कर्ता की सक्रियता के लिए सामग्री के महत्त्व पर निर्भर होती है। यदि सामग्री, कर्ता की सक्रियता के लक्ष्य का अभिन्न हिस्सा है, तो वह मस्तिष्क ( स्मृति ) में उस स्थिति की तुलना में कि जब वह इस लक्ष्य की प्राप्ति की परिस्थितियों या प्रणालियों से जुड़ी होती है, कहीं आसानी से अंकित हो जाती है

एक प्रयोग-श्रृंखला में दूसरी कक्षा के बच्चों और कॉलेज के छात्रों को पांच साधारण सवाल करने को दिये गये। बाद में अप्रत्याशित रूप से दोनों समूहों से सवालों की शर्तों और उनमें जो संख्याएं दी हुई थीं, उनका प्रत्यास्मरण करने को कहा गया। पाया गया कि दूसरी कक्षा के बच्चों को कॉलेज के छात्रों से तिगुनी ज़्यादा संख्याएं याद रह सकीं। इसका सीधा-सीधा कारण यह था कि वे अभी यंत्रवत जोड़-घटाव करना नहीं जानते थे और सवाल हल करना उनके लिए एक सार्थक सोद्देश्य क्रिया थी।

दूसरी कक्षा के बच्चों के विपरीत, जिनके लिए संख्याओं के साथ संक्रियाएं करना उनका लक्ष्य था, कॉलेज के छात्रों ने उसे प्रणाली में शामिल किया, यानि महत्त्व की दृष्टि से उसे गौण माना।

मनुष्य की सक्रियता में विभिन्न भूमिकाएं अदा करनेवाली सामग्री उसके लिए विभिन्न महत्त्व रखती है और इसलिए उसके प्रति उसके रवैये भी अलग-अलग होते हैं तथा उसका प्रबलन ( reinforcement ) भी वह अलग-अलग ढ़ंग से करता है। मुख्य लक्ष्य की अंतर्वस्तु अधिक सक्रिय रवैये का तकाज़ा करती है और सक्रियता के प्राप्त कर लिए गए लक्ष्य के रूप में अधिक प्रबलन पाती है। स्वभाविकतः वह मनुष्य की स्मृति में अधिक आसानी से घुस जाती है और लक्ष्य-प्राप्ति की परिस्थितियों से संबंधित सामग्री की तुलना में अधिक मज़बूती से वहां जमी रहती है।

यह भी दिखाया गया है कि लक्ष्यसापेक्ष सामग्री में स्थापित होनेवाले संबंध जितने ही सारगर्भित होंगे, वह उतने ही बेहतर ढंग से याद होगी और ज़्यादा देर तक स्मृति में बनी रहेगी

छात्रों को ह्र्दयंगम करने के लिए दिये गए टेक्स्टों के अनैच्छिक स्मरण से संबंधित अनुसंधानों ने दिखाया है कि मध्यम कठिनाई का टेक्स्ट, बहुत आसान टेक्स्ट की तुलना में जल्दी याद हो जाता है। जहां तक कठिन टेक्स्ट का सवाल है, तो वह भी आसानी से स्मरण हो जाता है, यदि उसके विश्लेषण की अधिक सक्रिय प्रणालियां इस्तेमाल की जाएं।

इस तरह जिस सामग्री के लिए सक्रिय बौद्धिक प्रयास ( active mental efforts ) की आवश्यकता होती है, उस सामग्री का अनैच्छिक स्मरण अधिक आसान होता है

सर्वविदित है कि हम अनजाने में वही चीज़ें अच्छी तरह और पूरी तरह, कभी-कभी तो जीवनभर के लिए, अपनी स्मृति में अंकित करते हैं, जो हमारे लिए अतिशय महत्त्व रखती हैं और हमारी रुचि तथा संवेग जगाती हैं। हम अपने कार्य की अंतर्वस्तु में जितनी ही गहरी रुचि लेंगे, अनैच्छिक स्मरण उतना ही अधिक कारगर होगा। यदि छात्र को पाठ रोचक लगता है, तो वह उसकी अंतर्वस्तु आसानी से याद कर लेगा। ऐसा तब नहीं होता, जब छात्र शिष्टतावश शिक्षक को सुनता है। प्रशिक्षण के दौरान अनैच्छिक स्मरण की शर्तों के एक विशेशः अध्ययन ने दिखाया है कि ऐसी एक शर्त, सीखने के लिए आंतरिक संज्ञानात्मक अभिप्रेरकों का निर्माण है। वांछित लक्ष्य अध्ययन के उद्देश्यों की एक ऐसी पद्धति विकसित करके पाया जा सकता है, जिसमें हर उपलब्धि अगली उपलब्धि की प्राप्ति का एक अनिवार्य साधन होती है।


अगली बार ऐच्छिक स्मरण पर चर्चा होगी।
इस बार इतना ही।

जाहिर है, एक वस्तुपरक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गुजरना हमारे लिए कई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है, हमें एक बेहतर मनुष्य बनाने में हमारी मदद कर सकता है।

शुक्रिया।

समय

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